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बुधवार, 13 जनवरी 2010

आपकी टिप्पी पर हमारा टिप्पा (टिप्पणी तडका )

जब हमने ये टिप्पी पे टिप्पा धरने वाला ब्लोग शुरू किया था तब मन में बस एक ही विचार था कि लोग जब यहां अपनी टीपों को टीप कर चल देते हैं तो फ़िर वो उस पोस्ट के साथ ही सिमट जाती हैं । सो सोचा कि पोस्टों की चर्चा,पोस्टों की बातें तो खूब होती हैं ,मगर टिप्पणि्यों का क्या, और फ़िर ऐसा तो नहीं कि उन टीपों को सजा के कोई गुलदस्ता न बनाया जा सके । तो बस गुलदस्ता सजाने के बाद ऊपर से गुलाब जल छिडक दिया है ॥आप मजा लीजीए

खुशदीप जी के ब्लोग पर

'अदा' said...

बॉलीवुड के सलमान खान और ब्लागवुड के महफूज़ अली में समानताएं....
१. दोनों नकचढ़े हैं..
२. दोनों अविवाहित हैं
३. दोनों की गर्ल फ्रेंड्स भाग जातीं हैं..
४. दोनों के डोले-शोले हैं..
५. दोनों बडबोले हैं...
६. दोनों दिल के बहुत अच्छे हैं..
७. दोनों लड़कियों से डरते हैं लेकिन दिखाते हैं की लडकियां उनसे डरतीं हैं
८. दोनों अपने-अपने में बड़े हैं
९. दोनों अपने-अपने घरों के आधार हैं....और घरवालों के लिए जान देते हैं..
१०. दोनों बेवकूफ हैं...
१२.दोनों की शक्ल भी थोड़ी मिलती है एक-दूसरे से
१३. दोनों घमंडी है
१४. दोनों जब भी मौका मिले बाडी दिखाते हैं..
१५. एक लेखक है दूसरा पेंटर यानी कलाकार हैं..

January 12, 2010 1:24 AM

हमारा टिप्पा :- लीजीए , अदा जी , एक तो पहिले ही महफ़ूज़ मियां , खुल्लम खुल्ला सांड हुए जाते हैं । कह रहे हैं हम तो अईसे ही झूम झूम के खेत सब चरेंगे ,दूसरा का उनको लाल कपडा दिखाएगा, उ तो खुदे लाल लंगोट बांध के दौड रहे हैं । अब उनको ई सलमान, आमिर , और शाहरूख बनाना छोडिए , और उनकी महफ़ूजनी का जुगाड कीजीये, बाराती तो ब्लोग्गर् सब जाएंगे ही , आखिर पता तो चले कि ब्लोग्गर को दामाद बनाने वाले को क्या क्या झेलना पडता है । फ़िर तो कह्ते फ़िरेंगे …..अरे यार कोई तो रोक लो ॥

हमारे अपने ब्लोग पर

बी एस पाबला ने कहा…

अभी देखा तो पाया कि खुद के द्वारा नियंत्रित हिन्दी, पंजाबी, अंगरेजी के 30 ब्लॉग हैं और करीब 4 अंग्रेजी की वेबसाईट्स। सभी विषय आधारित। किसी में कथित फूं-फां नहीं। साधारण सा लेखन ऐसा कि किसी को जानकारी जैसा कुछ प्राप्त हो। कोई मौज़ नहीं, कोई मस्ती नहीं। हाँ नियमित नहीं है लेखन्। इतनी फुरसत ही कहाँ है भई!
वैसे आपकी पोस्ट सारगर्भित

हमारा टिप्पा :- हा हा हा , सर जी हम सभी को जिन्न थोडी कह देते हैं यूं ही । ई तो वही जान सकता है जो आपके लंबे छोटे हाथों का कमाल देख रखा है । सब के सब विषय आधारित , बाप रे बाप । का सर केतना सब्जेक्ट पढ लिए हैं आप । छपास, बधाई, विज्ञान, अपनी बात, कमाई ,और पता नहीं क्या क्या ।हम तो सोच रहे हैं कि आपही के साथ एक ज्वाईंट अकाऊंट खुलवा लेंगे , ब्लोग से जब भी कोई कमाई होगी बिना एफ़डी कराए डबल हो जाईगी ॥

डागदर बाबू (डा. अमर जी ) के ब्लोग पर

अजय कुमार झा टिपियाइन कि

ल्यो , अथ डागदर बाबू कथा बार्ता प्रथमो अध्याय , स्टार्टम भवति । पहिले टेस्ट पोस्ट में कय ठो फ़ेल हो गईल हो डागदर बाबू हमरे तो लाग रहत बा कि जल्दीए सबके हुमोग्लोबिन आर डब्ल्यू बी सी , सबके टेस्ट होईये जाई । देखल जाय ई टेस्ट कय लोगन के टेस्ट (स्वाद बला हो ) बिगाड देत हय जी ॥
अजय कुमार झा

11 January 2010 10:46 PM

हमारा टिप्पा :- लो , अब अपने ही टीप पर टिप्पा, ए हो डागदर बाबू काहे लिए एतना घोटमघोट लिख कर सबको माथा पकडा देते हैं जी । हमको तो सब बूझा गया , काहे से कि हम आपके पुराने पेशेंट हैं ,मुदा और बहुते लोग आपका क्लीनिक अभी नहीं न ज्वाईन किया है । हां टेस्ट का रिजल्ट अगला पोस्ट में बताईएगा जरूर ….

रवीश जी के कस्बे पर

JC said...

जिस प्रकार मेरे बाबूजी अपने जीवन के अंतिम पडाव में मेरे साथ रहे '८५-'८६ में, तब वो टीवी के हर प्रोग्राम देखते थे - और देखने के बाद कहते थे "वाहियाद!"...वैसे ही भविष्यवाणी (मौसम की भी, समाचार पत्र/ टीवी में जैसे - जो अधिकतर गलत ही होती हैं) सुनने या पढने या देखने में हर कोई दिलचस्पी रखते हैं...यदि वो सत्य साबित हो जाये तो उनका विश्वाश अटूट हो जाता है किसी न किसी विधा पर, भले उसका कुछ भी नाम रहा हो, 'हस्तरेखा विज्ञान', 'अस्त्रोलोजी' या 'शस्त्रोलोजी' आदि, आदि...उस विश्वास को बनाये रखने के लिए कृष्ण के मामा कंस द्वारा सुनी गयी भविष्यवाणी की कहानी एक बड़ा रोल अदा करती है...
दिल्ली में अंग्रेजी का 'लिंटेल' मिस्त्री लोग 'लंटर' उच्चारते हैं...एक कहावत है, "जो घोष लिखता है / उसे बोस सही समझता है."...

हमारा टिप्पा :- एक दम धांसू टाईप टीपे हैं जे सी साहब । और ऊ का कहते है, ई रेट्रो टाईप याद सब , कमाल है था उ दिन सब , हम तो सोचते हैं कि जितना आनंद हम लोग को अपने बाबूजी के साथ आया करता था , ओतना हमरे बच्चा सबको अपने बाबूजी , नहीं नहीं पापा के साथ कहां आ रहा है ????

गोदियाल जी के अंधड पे

ललित शर्मा said...

बहुत ही चिंतनीय विषय है। चारों तरफ़ मंहगाई का तांडव हो रहा है, सरकार उदासीन हैं, चारों तरफ़ लुट मची है, निम्न मध्यम वर्ग पिस रहा है दो पाटों के बीच लेकिन ये प्रजातंत्र है आज नही तो कल जवाब देना ही पडेगा।
कभी हंसता हुआ मधुमास भी तुम देखोगे।
कभी समंदर सी प्यास भी तुम देखोगे
कलमुही सत्ता के मद मे ना झुमो इतना
कल जनता का दिया बनवास भी तुम देखोगे

January 12, 2010 4:05 AM

हमार टिप्पा :- ललित जी आपकी टिप्पी पर टिप्पा लगाना भाई हमरे बस का नहीं है जी , एक तो एतना गंभीर गंभीर बात ऊपर से कविता दोहे भी । माने रसगुल्ला के ऊपर मलाई लपेट दिए हैं । गोदियाल जी का पोस्ट हो और उस पर आपका टीप हो तो छटा देखते ही बनता है जी ॥

बाबा लंगोटानंद को ठंड का उपाय बताते हुए

महेन्द्र मिश्र said...

बाबा लंगोटा नन्द के लंगोट में हीटर फिट कराया जाए ......

13 January 2010 03:02

हमार टिप्पा :-हा हा हा , महेन्द्र भाई , ई तो बाबा जी को आप व्हाट एन आइडिया टाईप आइडिया दे डाले । हीटर का जो जगह आप बताए हैं , ऊ का व्यबस्था यदि सच में किसी ने कर दिया तो बाबा के अंदर जो ग्लोबल वार्मिंग होगी उ से तो हिमालय तो हिमालय हमको तो लगता है पूरा ब्रह्मांड ही पानी पानी हो जाएगा ॥

हमने खबरों की खबर ली तो वकील साहब बोले

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

भाई, आप तो पक्के टिप्पणीबाज हैं।

हमारा टिप्पा :-क्या सर , ई आपको अब पता चला , इहां इहे क्वालिटि /डिसक्वालिटी पर अपना दो दो ठो आउटलेट चल रहा है । एक तो इहे है और दूसरा उहे जिस पर आप ई टीपे हैं । हां बाज का तो पता नहीं टिप्पणी काग जरूरे है । दिन भर कांव कांव करते हैं और फ़िर भी मन नहीं भरता है …कांव कांव मतबल टीप जी ….

ताऊ जी के ब्लोग पर

Ratan Singh Shekhawat

Wednesday, January 13, 2010 9:01:00 AM

१. क्या हमको पलायन करना चाहिये?
इस देश की वीर भूमि राजस्थान में पैदा हुए है ताऊ श्री ! पलायन शब्द तो शब्दकोष में भी नहीं है | रणछोड़ दास कैसे बन जाएँ | इसलिए यह प्रश्न तो सिरे से ही नकार दीजिए |
धीर गंभीर लोग तो चाहते है कि किसी भी हथकंडे से ये मुस्कान देवी के पुजारी पलायन करले और वे एक छत्र राज्य करते रहें यदि पलायन करते है तो समझिये उनका मनोरथ पूरा हो गया इसलिए जमे रहें लोगों को हंसाते व खुद हँसते हुए मस्त रहे | पूरा ब्लॉगजगत जनता है कि लोग किसको ज्यादा पसंद करते है ?
२. क्या हमे इधर उधर से मार कर ब्लडी, ईडियट, साला, ससुरा, शराब, सिगरेट जैसे शब्दों को डालकर गंभीर लेखन करने का नाटक करना चाहिये?
ये शब्द उन्ही को मुबारक हो | हमारी संस्कृति में इन शब्दों के लिए जगह नहीं है | यदि यही गंभीर लेखन का पैमाना है तो लानत है ऐसे गंभीर लेखन पर और एसा लिखने वालों की संस्कृति पर |
३. क्या हमे एक ठिल्लूआ क्लब की स्थापना करनी चाहिये? जिससे गंभीरता को अलसेट लगाई जा सके?
हाँ ! ये बात हमें भी जम रही है | यह क्लब जरुर बनना चाहिए और ठिल्लुआ लेखन खूब ठेलना चाहिए ताकि उन गम्भिरियों को भी पता लगे लोग क्यापढना पसंद करते है ठिल्लुआ या गंभीर |
आप तो रामप्यारी ,हिरामन ,चम्पाकली ,झंडू सियार आदि के साथ खूंटे पर जमे रहे |
इन चरित्रों और खूंटे की बढती लोकप्रियता से जो लोग जलकर तीर चला रहे है उनका और दिल जलाने से मुस्कान देवी की सच्ची आराधना होगी |

हमार टिप्पा :- अरे रतन भाई , एतना लंबा टीप के बाद कसम है ताऊ को जो पलायन उलायन वाला बात बोले तो । अरे हम तो कह दिए हैं उनको कि ई गंभीर और चतुर रामलिंगम टाईप थ्योरी पर सोचने लगे हैं आज भी रामप्यारी अपने पहली पर जेतना टीप ले उडती है ,ओतना तो केतना को पूरा साल में भी नसीब नहीं होता है । है किसी में हिम्मत तो बिल्लन के रिकार्ड को तोडना तो दूर छू कर भी दिखाए ॥हां , नहीं तो …

सांड जी के ब्लोग पर

Yashwant Mehta, January 13, 2010 12:40 AM

वाह वाह
आज सांड महाराज का मूड बड़ा अच्छा लगता हैं. बड़ी गंभीर बात कह दी. बिलकुल सही, यह बाहर की दुनिया में कम गलियां सुनते हैं जो अब यहाँ पर भी सुने. ब्लॉग जगत में प्रेम का गीत गाते हुए आईये भाईचारे के साथ एक दुसरे की रचनाओ को चरते चले. आपकी रचना चर ली हैं और डकार भी मार ली. आईये हमारे ब्लॉग पर और चर डालिए सारीरचनाये

हमार टिप्पा :- आ हा हा , महाराज नंदी फ़्रैंड सांड जी के ब्लोग पर पहुंच कर उनका आशीर्वचनों का प्रसाद के बाद यशवंत भाई एतना प्रम पूर्वक, श्रद्धा से उनको दावत के लिए आमंत्रित किए हैं कि बस मन हरिया गया है ॥ सांड जी को भी हैप्पी ब्लाग्गिंग ,बस अब तो मेनका जी रह गई हैं , बकिया पूरा फ़ौज् तो ब्लोगियाईए रहा है जी

19 टिप्‍पणियां:

  1. बसे पहले अजय जी को हमारा नमस्कार!
    एक ही न बार फुनियाये रहे आप हमसे कोकास जी के घर!!!!!!!!!!
    अब भाई इ टिप्पी का टिप्पा निकाल के कमाल ही
    कर दिया है आपने. पर का करें हम टिपियाये के लाइक
    लिखते ही नहीं हैं तो टिप्पी का टिप्पा बन जाय कैसे सोच लेब
    वैसे बहुत अच्छा सोच के ये बनाये हैं आप. बहुते बढ़िया.

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  2. सही टिप्पी पर टिप्पा मारे हो अजय भाई
    सांड जी आज बहुत हैप्पी हैप्पी थे
    हमारे निमत्रण के मात्र १ मिनट बाद पधारे
    और सारी रचनाये चर गए

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  3. क्या गजब के टिप्पेबाज निकले आप तो!! :) मस्त मस्ट टिप्पाज़!!

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  4. अचरज में दुनिया सारी है!
    टिप्पी पर टिप्पा भारी है!
    उत्तरायणी पर्व की शुभकामनाएँ!

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  5. बाप रे इतना डूब के पढ़ रहे और फिर आचमन कर रहे -

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  6. मिसिर जी का हीटर तो जोरदार है,
    हा हा हा हा

    बहुत शानदार टिप्पा चल रहा है अजय भाई
    मकर संक्राति की बधाई हो बधाई

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  7. हा..हा..हां. अजय जी आप तो काफी बड़े टप्पे बाज़ हैं पढ़ाई के दिनों में टीपा टीपी खूब किये रहे का!!!! आनंद आ गया भाई!!!आनंद क्या भींवराज ही आ गए ( भींवराज आनंद के पिताजी है )

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  8. सूना था यहाँ घास का गठ्ठा है !! गलत इन्फोर्मेशन मिली थी !! यहाँ तो घास का पूरा मैदान है !!!

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  9. आपके टिप्पा पर हम बाद में कुछ कहेंगे पर पहले ये बताया जाये कि "टिप्पी", "टिप्पा" और "टिप्पी पर टिप्पा" को अंग्रेजी में क्या कहते हैं?

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  10. अजय जी,

    आपने तो टिप्पी पर टिप्पा बड़े ज़बरदस्त तरीके से लगाया ....बहुत खूब..... झकास

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  11. आदरणीय अवधिया जी , हमरी अपनी निजि डिक्शनरी में ई का इंग्रेजी अनुवाद है "a Dent on Comment" हा हा हा , ठीक रहेगा न
    अजय कुमार झा

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  12. वाह ये तो कमाल का आईडिया है, टिप्पी के उपर टिप्पा बहुत वजनदार है. आनंद आया.

    रामराम.

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हमने तो आपकी टीपों पर एक टिप्पा धर दिया अब आपकी बारी है
कर दिजीये इस टिप्पा के ऊपर एक लारा लप्पा

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