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मंगलवार, 9 फ़रवरी 2010

आप टीप के निकल जाते हैं, हम उसे यहां टिकाते हैं

 

भाई खुशदीप के देशनामा पर

Udan Tashtari said...

मेहमान-ए-खुसुसी :)
राज जी और कविता जी की उपस्थिति ने आयोजन को अन्तर्राष्ट्रीय बना दिया जी.
एक ही साल में यह असर खुशदीप ब्लॉगिंग का की यंगनेस जाती रही..अब समझ में आ रहा है मुझे अपने लिए कि चार साल में मेरी क्या दुर्गति हुई है वरना मियाँ, हम भी जवानों के जवान थे कभी. :)
महफूज़ की शादी तो खैर कई वजहों से जरुरी हो गई है, उसमें यह वजह और आ जुड़ी. अब तो मार्जिन बहुत बारीक बचा है. :)
दराल साहब का हरियाणवी किस्सा जोरदार रहा!
सरवत जमाल साहेब की उपस्थिति उल्लेखनीय रही. हमारे गोरखपुरिया भाई जी हैं.
खाने से ध्यान हटाने की कोशिश में अपना नाम और उल्लेख ठीक खाने के मेनु के बाद देखना कितना सुखद रहा कि क्या बताऊँ..सब आप लोगों का स्नेह है.
सब देख सुन कर आप सही कह रहे हैं हिन्दी ब्लॉगिंग के बढ़ते कदमों को कोई नहीं रोक सकता.
जय हो हिन्दी!! जय हो हिन्दी ब्लॉगिंग!! जय हो हिन्दी ब्लॉगर्स!!

February 8, 2010 11:51 PM

 

हमारा टिप्पा:-…बिल्कुले ठीक कहे हैं आप कि दुनो जन राज भाटिया जी और कविता जी के आने से हम लोग का मीट इंटरनेशनल लुक मिल गया , बस एक आप जाते तो हम लोग एस्ट्रोनौटिकल मीट कर लेते …..और गजब का शोर मच जाता कि …….इंसानो और एलियन जी ने भी आपस में की ब्लोग्गिंग मीट ।……..ई महफ़ूज़ भाई की शादी और भी बहुत कारण से जरूरी है ……अरे तो हमको समझ में नहीं आता कि ई महफ़ूज़ भाई अपनी लाईफ़ में से ई मोडरेशन काहे नहीं हटाते हैं ?? खाने के मीनू के बाद आपका नाम आया ……….एक दम ठीक आया ….उससे पहले आता तो ……बचता का ………न मीनू….न खाना ? केतना ध्यान रहता है ….भोजन पर । आईये आपके वाले ब्लोग्गर मीट में तो खास तौर से ब्लोग्गर व्रत मीट ( बताईये …व्रत और मीट ..एक साथ राम राम ) रखा जाएगा ॥

 

हमारे अपने ब्लोग पर :-

 

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

एक दुकानदार किस्तों में सायकिल बेच रहा था। हमने उस से सौदा कर लिया। बस दस रुपया हफ्ता चुकाना था। हमने पहली किस्त के दस रुपए दिए। और कहा सायकिल कस दो। उस ने दस रुपए लेकर रसीद पकड़ाई और दुकान के अंदर से सायकिल का एक पैडल लाकर बोला। हर किस्त में एक आइटम दूंगा किस्तें पूरी होने पर पूरी सायकिल कस दूंगा।
अजय भाई अब लगता है कि किस्तें पूरी हो जाने पर रिपोर्टे को पूरी कस के एक बार और पढ़ना पड़ेगा।

 

हमारा टिप्पा:- का सर , ई कौन शहर में ई दुकान है बताईये तो , पता करिये न तनिक हफ़्ता में बीस रुप्पैया देने पर एक ठो स्कूटर लेना था । और कार वाला किस्त बता देते तो हम राज ग्वालानी भाई को कह देते एतना दिन ऊ बेकार न रहते खैर ।…हा हा हा …..हम भी सबसे आखिरी में हैंडल देंगे ….बिना उसको कसे आप आगे नहीं बढ पाईयेगा ।

 

रश्मि रविजा के ब्लोग पर :-

 

Arvind Mishra said...

हिंदी को समृद्ध करने के लिए दूसरी भाषाओं के शब्द भी समाहित करने चाहिए.सिर्फ अंग्रेजी ही नहीं अगर संभव हो तो स्पेनिश,फ्रेंच,इटैलियन शब्द भी शामिल करने चाहिए.
बस यही है बाटम लाईन!

February 8, 2010 7:17 AM

हमार टिप्पा :- कि मिसिर जी , हमको पकिया आप कंफ़्यूजिया दीजीएगा । लोग बाग लिखेंगे स्पेनिश, फ़्रेंच , इटैलियन में , और पाठक ऊ पर टीपेंगे चाईनीज़ , जापानी, हिब्रू में …..और उस पर हम टिप्पा लगाएंगे …..भोजपुरी , मैथिली , संस्कृत में । एक ठो मलटी नेशनल , मल्टी लैंग्वेज, मल्टी डिलिशियस ……औरो जेतना टाईप का मल्टी है सब पलटी मार के आएगा उसमें ॥

गोदियाल जी के अंधड पे :-

 

पी.सी.गोदियाल said...

ताउजी, फिर तो अगली ब्लोगर मीट सियाचिन में न रख ले, हफ्ते भर के लिए :)

February 7, 2010 10:26 PM

 

ताऊ रामपुरिया said...

गोदियाल जी मैं आपके प्रस्ताव का समर्थन करता हूं. समय दिनाकं तय करके पोस्ट द्वारा सभी को सुचित किया जाये.
रामराम.

हमारा टिप्पा :- ई का हो रहा है भाई । ई माजरा का है ? आयं ई एक जन प्रस्ताव दिये दूसरा जन समर्थन दे दिए और चल दिए दुनु जन सियाचिन पर ब्लोग्गर मीट करने । अरे आप दुनु चाचा ताऊ लोग हम बच्चा लोग के बिना कैसे जा सकते हैं जी । ऊ भी मोटापा कम करने के नाम पर । ओतेरे कि तब तो आप लोग जौन मीट करियेगा …उसमें जरूरे खाने पीने के लिए खाली ताजा हवा पानी मिलेगा ।………सुन रहे हैं न एलियन जी ….??? रामप्यारी भी हमरे साथ है । चलिए चीनी लोग के साथ भी होईये जाए एक ठो ब्लोगर मीट

ललित जी के ब्लोग पर :-

महफूज़ अली९ फरवरी २०१० ९:३५ AM

ओह! शुरुआत में आपने तो डरा ही दिया था..... मैंने अपना लाठी -बल्लम निकल लिया था.... फिर बाकी पढ़ा तो चैन आया..... पर इसी बहाने लाठी-बल्लम बाहर निकल आये.... उनको तेल पिला कर..मालिश वालिश कर के.... बरसात में धूप दिखा रहा हूँ.....
दस दिन तक आपकी कमी खलेगी.... पर मोबाइल है ना..... :)

हमारा टिप्पा :- अरे रे ! का ललित जी । ई अपना महफ़ूज़ भाई तो पहिले से ही लाल कच्छा पहन के सांड को गज़ल सुनाने के लिए तैयार रहते हैं , ऊपर से आप अईसन अईसन लीव एप्लीकेशन दीजीएगा तो ..लाठी बल्लम निकलबे करेगा । बताईये इहां तेल लगाने को नहीं है एक ऊ हैं नवाब साहब लठिया सब को ही पिला रहे हैं । एतना दंड काहे पेलते हैं जी …तभी न टरेन छूट जाता है ।अरे एतने बडका पहलवान हैं तो काहे नही wwf  में चले जाते हैं …..अरे मतलब गृहस्थ जीवन में जी और का

अजित जी के शब्दों के सफ़र पे :-

अविनाश वाचस्पति said...

वैसे भी अंगूर में अ है
इसलिए भी अच्‍छे हैं
आम में भी जुड़े हुए
अ के लच्‍छे हैं
खजूर का ख
उसे खट्टा बनाता है
और आंवला, इमली, अमचूर की
उपयोगिता बतलाता आपका सफर
सदा खट्टे मीठे का अद्भत स्‍वाद
मन में भीतर तक बहाता है।

February 9, 2010 7:22 AM

हमार टिप्पा :- ई लीजीए अजित भाई के शब्दों के सफ़र की क्लास में अविनाश भाई का ट्यूशन किलास …..फ़्री फ़्री फ़्री …..का धांसू औफ़र दिए हैं जी । तो पहुंचिए फ़टाफ़ट और सीखीए अ…..से अनोनोमस , ब से ब्लोग्गर …प से …पोस्ट….ट ….से टिप्पी …., टं ….से टंकी ….सफ़र जारी है ॥

ब्लोग औन प्रिंट की इस पोस्ट पर हम खुद :-

ब्लॉगर अजय कुमार झा ने कहा…

हा हा हा सर मैं इस बात की बधाई और मुबारकबाद सभी मित्रों और पूरे ब्लोगजगत को देता इससे पहले ब्लोगवाणी पर देखा कि ......आपके डेडिकेटेड ...मि. नापसंद ..अपना काम कर के जा चुके हैं ...यानि उन्हें ये भी नापसंद आया ...हा हा हा ..अभी हंस लेता हूं ..बाकी बातें बाद में
अजय कुमार झा

८ फरवरी २०१० ७:३२ PM

हटाएँ

हमार टिप्पा :- लो कल्लो बात अब ई हम अपने कहे पर ही टिप्पा दें ,  मुदा कानून तो कानून है ….सबके लिए बराबर और सबके लिए ही अंधा । अब का करें हमको लगता था कि हम लोग केतना डेडिकेटेड टाईप से घुसे हुए हैं ब्लोग्गिंग में । जब देखो पोस्ट टीप , टीप प्रति टीप , मीट ……..मीट मसाला …..मुदा जब से ई मि. नापसंद जी आए हैं ब्लोग्गिंग करने तभिए से सबको हिट सुपर हिट किए दे रहे हैं । कभी लोग बाग अंगूठा उठा के थ्म्स अप किया करते थे । अब ई साहब ..अंगूठा डुबा के पोस्ट अप करा देते हैं सबका

15 टिप्‍पणियां:

  1. टिप्पी और टिप्पा दोनों ही पसंद आये। बस आप इसी तरह टिप्पियों को टिप्पा कर टिकाते रहिये!

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  2. वाह अजय जी ये भी खूब रहा आप की तो हर शैली लाजबाब है
    मजा आ गया
    सादर
    प्रवीण पथिक
    9971969084

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  3. बहुत खूब
    अन्दाज़ निराला है

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  4. बहुत बढ़िया टिप्पा-टिप्पी खेली आपने झा साहब !

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  5. टिप्पी टिप्पा से दिन बन जाता है..बहुत सटीक पकड़ के लाते हैं और जबरदस्त टिप्पा खिलाते हैं. :)

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  6. वाह क्या अन्दाज़ है ये बडिया है कई बार अपना टिपयाया हुया देखना अच्छा लगता है । टिप्पा टिप्पी का ये खेल अच्छा लगा आभार

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  7. बिना टिपाये टिपा दिया
    टीन टान टन टन टंकी
    बजा दिया घन घन घनन घन
    मनवा रे चिंतन कर मनन धन

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  8. एकदम जूदा है अंदाज़-ऐ-बयाँ.....

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  9. क्‍या अंदाज है .. कुछ टिप्‍पणियों पर अभी तक मेरी नजर भी नहीं गयी थी .. और उसपर टिप्‍पा तो कमाल का रहा .. वह बहुत खूब !!

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  10. वाकई ये बहुत बारीकी का काम है..पर हमे क्या...हमें तो आनंद आजाता है और उपर से आपका टिप्पा यानि सोने मे सुहागा.

    रामराम.

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  11. इतना खूबसूरत आइडिया तो किसी के दिमाग़ में भी नही आया होगा आपको छोड़ कर, ये प्रोग्राम बहुत बढ़िया चल रहा है भाई चलने दीजिएगा...

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  12. ये टिप्पा का टिप्पा शानदार है ...

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  13. यह अंदाज भी है आपका जुदा
    अपने अजय को नजर न लगे खुदा

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  14. यह तो एकदम काकटेल पार्टी हो गयी। सभी कुछ था इसमें। बढ़िया।

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हमने तो आपकी टीपों पर एक टिप्पा धर दिया अब आपकी बारी है
कर दिजीये इस टिप्पा के ऊपर एक लारा लप्पा

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